About NGO (गैर सरकारी संगठन के बारे में)

एनजीओ का अर्थ होता है- गैर सरकारी संगठन। एनजीओ एक निजी संगठन होता है जो लोगों का दुख-दर्द दूर करने, निर्धनों के हितों का संवर्द्धन करने, पर्यावरण की रक्षा करने, बुनियादी सामाजिक सेवाएँ प्रदान करने अथवा सामुदायिक विकास के लिये गतिविधियाँ चलाता है। वे गैर लाभकारी होते हैं, अर्थात् वे लाभ का वितरण अपने मालिकों और निदेशकों के बीच नहीं करते बल्कि प्राप्त लाभ को संगठन में ही लगाना होता है। वे किसी सार्वजनिक उद्देश्य को लक्षित होते हैं। गैर सरकारी संस्थाओं को विदेशी धन प्राप्त करने के लिये एफसीआरए, 2010 के अंतर्गत पंजीकृत होना पड़ता है या पूर्व अनुमति लेनी होती है। भारत में गैर सरकारी संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये कोई एक विशेष कानून अथवा कोई शीर्ष संगठन नहीं है। देश में आज ऐसे बहुत से गरीब और बेसहारा लोग है जो गरीबी और उत्पीड़न का शिकार है वहीं आज के ऐसे दौर में जहाँ इंसानियत शायद ही बची होगी उन्हीं में से Ngo Organization किसी फ़रिश्ते से कम नहीं है जो अपने लाभ के बारे में बिना सोचे इन लोगों की मदद करते है। गैर सरकारी संगठनों की भूमिका-गैर सरकारी संगठनों की उपस्थिति नागरिकों की आवाज को अभिव्यक्ति देकर सहभागी लोकतंत्र को सक्षम बनाती है। ये निम्नलिखित माध्यमों से जनता और सरकार के बीच प्रभावी गैर-राजनीतिक कड़ी के रूप में कार्य करते हैं: परामर्श और रणनीतिक सहयोग, जहाँ सरकार द्वारा गठित कमिटियों, टास्क फोर्स और सलाहकार पैनल में गैर सरकारी संगठनों को शामिल कर उनकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जाता है। जागरूकता फैलाने, सामाजिक एकजुटता, सेवा वितरण, प्रशिक्षण, अध्ययन व अनुसंधान एवं सार्वजनिक अपेक्षा को स्वर देने में ये सहयोग करते हैं। सरकार के प्रदर्शन पर संवाद व निगरानी द्वारा वे राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित कराते हैं। भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार या मनरेगा और सबसे महत्त्वपूर्ण सूचना का अधिकार जैसे कई प्रमुख विधेयक गैर सरकारी संगठनों के हस्तक्षेप से ही पारित हुए। एनजीओ किसी मिशन के तहत चलाए जाते हैं। सामाजिक समस्याओं को हल करना और विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गतिविधियों को बल देना एक एनजीओ का मुख्य उद्देश्य होता है। कार्यक्षेत्र के रूप में कृषि, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कृति, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, महिला समस्या, बाल-विकास आदि में से कोई भी चुना जा सकता है।